एक्सप्रेस-वे पर रात्रि 1 से 4 तक वाहनों का प्रवेश हो निषिद्ध: ADF

आगरा। 165 किलोमीटर लम्बे यमुना एक्सप्रेसवे और 302 किलो मीटर लम्बे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इस शीत ऋतु में एक के बाद एक ह्नदयविदारक सड़क हादसे हो रहे हैं। कोहरा और तेज गति इसके मुख्य कारण हैं जिसको लेकर आगरा डेवलपमेन्ट फाउन्डेशन (ADF) के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर मांग की कि जब भी एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा हो और दृश्यता 500 मीटर से कम हो, वाहनों के आवागमन को रोक देना चाहिए। यही नहीं यदि हमें एक्सप्रेसवे पर हादसों की गति पर रोक लगानी है तो रात्रि में भी 1 बजे से 4 बजे तक वाहनों के आवागमन पर रोक लगनी चाहिए जो कि इसी समय पर रात्रि में अधिकांश हादसे एक्सप्रेसवे पर होते हैं।

उत्तर प्रदेश शासन के परिवहन विभाग द्वारा वर्ष 2019 के सम्बन्ध में सड़क हादसों पर जारी रिपोर्ट का सन्दर्भ देते हुए एडीएफ की ओर से सचिव जैन ने कहा कि वर्ष 2019 में प्रदेश में 42572 सड़क हादसे हुए जिसमें से कोहरे से होने वाले हादसे 8031 थे जो कि कुल हादसों का लगभग 19 प्रतिशत था जिसमें 3781 व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी और 5350 व्यक्ति घायल हो गये। यमुना एक्सप्रेसवे के आंकड़े भी यही बताते हैं कि 2012 से लेकर जून 2018 तक 235 हादसे कोहरे की वजह से हुए। घने कोहरे में दृश्यता शून्य हो जाती है और हादसे होने की आशंका अत्यधिक होती है। इसके चलते यह आवश्यक है कि यदि एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा हो और 500 मीटर तक की दृश्यता न हो तो वाहनों को एक्सप्रेसवे पर प्रवेश न करने दिया जाये।

आईआईटी (दिल्ली) द्वारा यमुना एक्सप्रेसवे की रोड सेफ्टी आॅडिट रिपोर्ट 29 अप्रैल 2019 में दी थी जिसमें 2012 से लेकर 2018 तक के एक्सप्रेसवे के हादसों के समय का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि सांय 6 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे तक 21 प्रतिशत और रात्रि 12 बजे से लेकर प्रातः 6 बजे तक 43 प्रतिशत हादसे होते हैं और प्रातः 6 बजे से लेकर सांय 6 बजे तक 36 प्रतिशत हादसे होते हैं। इस प्रकार सांय 6 बजे से लेकर प्रातः 6 बजे तक 64 प्रतिशत हादसे एक्सप्रेसवे पर हो जाते हैं और इसमें भी मुख्य रूप से यह हादसे रात्रि 12 बजे से 6 बजे तक होते हैं। आईआईटी दिल्ली के इस निष्कर्ष का उल्लेख कर जैन द्वारा यह भी मांग की गयी कि रात्रि में 1 बजे से लेकर 4 बजे तक एक्सप्रेसवे पर किसी भी वाहन का आवागमन पूरे वर्ष नहीं होना चाहिए। ऐसे समय पर वाहन चालक भी थका होता है और झपकी लग जाने से हादसा हो जाता है। 100 किलोमीटर की गति से यदि वाहन चल रहा हो तो एक सैकेण्ड के समय में वाहन 28 मीटर आगे बढ़ जाता है। पल भर का झौंका तेज चल रहे वाहन को कहीं का कहीं पहुंचा देता है और नतीजा हादसा होता है।

आईआईटी दिल्ली की आॅडिट रिपोर्ट में गति सीमा नियन्त्रण करने के लिए यह भी संस्तुति की गयी है कि एक टोल प्लाजा से अगले टोल प्लाजा के बीच की दूरी में जितना समय वाहन ने लगाया उसके आधार पर उसकी गति की गणना करनी चाहिए और यदि निर्धारित गति सीमा से अधिक गति पायी जाये तो चालान किया जाना चाहिए क्योंकि वाहन चालक चालान से बचने के लिए कैमरा आने से पहले प्रायः अपनी गति कम कर देते हैं और उस चालाकी के कारण उनका चालान होने से बच जाता है। कैमरों की संख्या भी बढ़नी चाहिए और अलग-अलग लोकेशन पर कैमरों के द्वारा गति सीमा को चैक करना चाहिए।

प्रदेश में अनेकों नये एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं। 296 किलोमीटर लम्बा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे, 594 किलोमीटर लम्बा गंगा एक्सप्रेसवे 340 किलोमीटर लम्बा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। यदि हादसों को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्थाऐं नहीं की गयी तो सभी एक्सप्रेसवे सड़क हादसों के लिए जाने जायेंगे। एडीएफ की ओर से यह आशा की गयी कि शासन द्वारा इस सम्बन्ध में पहल की जायेगी और बहुमूल्य मानव जीवन बचाया जा सकेगा।

-Legend News

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