देश में करीब 30% कोरोना संक्रमित जमात के, कुछ राज्‍यों में 91% तक मरीज सिर्फ जमाती

नई दिल्‍ली। कोरोना पर डेली प्रेस ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि तबलीगी जमात से संबंधित मरीज देश के 23 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में पाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि देश में करीब 30% कोरोना मरीज सिर्फ तबलीगी जमात से संबंधित हैं।
यही नहीं, कोविड-19 मरीजों की संख्या के लिहाज से टॉप 10 राज्यों में पांच राज्य ऐसे हैं, जहां जमाती मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है।
देश में करीब 30% कोविड मरीज जमात के
अग्रवाल ने बताया, ‘14,378 पॉजिटिव केस में 4,291 केस यानी करीब 29.8% निजामुद्दीन मरकज से संबंधित पाए गए हैं। इससे 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मरकज से संबंधित मरीज मिले। खासकर, तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में मरकज के मरीज ज्यादा पाए गए हैं और ये राज्य कोविड-19 मरीजों की तुलना में टॉप 10 राज्यों में शुमार हो गए।’
91% तक मरीज सिर्फ जमात के
अब कुछ आंकड़े ऐसे हैं जो किसी को भी हैरानी में डाल सकते हैं। अग्रवाल ने कहा कि कुछ राज्यों में अकेले तबलीगी जमात से संबंधित मरीज 91% तक पाए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘असम में से 35 में से 32 केस यानी 91%, अंडमान में से 12 में से 10 यानी 81% केस जमात से हैं।’ वहीं, टॉप 10 राज्यों में शुमार उपर्युक्त पांच राज्यों में की बात की जाए तो तमिलनाडु में 84%, दिल्ली में 63%, तेलंगाना में 79%, यूपी में 59% और आंध्र प्रदेश में 61% केस जमात से संबंधित हैं। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अरुणाचल प्रदेश ऐसा राज्य बन गया है जिसका नाम एक जमाती की वजह से ही कोरोना प्रभावित राज्य में शामिल हो गया है।
अग्रवाल ने कहा, ‘अरुणाचल में जो एक मामला सामने आया, वह तबलीगी जमात से संबंधित है।’
देश के ताजा हालात
गौरतलब है कि देश में 1,992 लोग कोविड-19 से ठीक हो चुके हैं। यानी करीब 13.85% मरीज ठीक हो रहे हैं। एक दिन में 991 नए मरीज सामने आए हैं। अब देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 14,378 हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में 43 मरीजों की मौत हुई है। इसके साथ ही अब तक 480 कोविड-19 पेशंट दम तोड़ चुके हैं।
आश्‍चर्य की बात यह है कि इतना सब किए जाने के बावजूद देश में कोरोना संकट को हवा देने में तबलीगी जमात की भूमिका की चर्चा होते ही एक वर्ग आग बबूला हो उठता है और इसे हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई बढ़ाने की रणनीति करार दे देता है। पहलवान बबिका फोगाट ने जब तबलीगी जमात की लापरवाही पर चिंता व्यक्त की तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं।
हद तो यह हो गई कि सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति राय ने जर्मन न्यूज़ नेटवर्क डॉचे वेले (DW) से बातचीत में यहां तक कह दिया कि भारत सरकार कोरोना संकट की आड़ में मुस्लिमों के नरसंहार की रणनीति पर काम कर रही है। तो सवाल उठता है कि क्या सच में तबलीगी जमात के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?
इसका जवाब आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी इन महत्वपूर्ण आंकड़ों से पाया जा सकता है।
-एजेंसियां

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