अबे कंगले सुपर पावर, एक गरीब देश की मजदूरी खाता है…तेरे पेट में मरोड़ उठेगा

अब्दुल्ला पनवाड़ी के बारे में आपको मैं शायद पहले भी दो-तीन बार बता चुका हूं कि मोहल्ले में वो ही मेरा सबसे अच्छा दोस्त है.
अखबार पहले खुद चाटता है और फिर टिप्पणी भी करता है और फिर पूरी टिप्पणी मेरे कानों में पल्ली लगाकर उड़ेल देता है.
कल से अब्दुल्ला पनवाड़ी फिर गुस्से में है.
उसे ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी कि अमरीका ने पाकिस्तान के वो 30 करोड़ डॉलर भी रोक लिए जो उस पगार में शामिल हैं जो अमरीका पाकिस्तान को 9/11 के बाद से आंतकवाद से निपटारे में अपनी सहायता के नाम पर देता आ रहा है.
भाई साहब ऐसे तो ओम पुरी भी बॉलीवुड फ़िल्मों में अपने खेत मजदूरों और किसानों के साथ नहीं करता था.
वसूल के दिखाओ
कद्दू की सुपर पावर है ये अमरीका.
भाईजी इतनी छिछोरी सुपर पावर आपने कभी देखी है जो उस समय पैसे रोके जब हमें पाई-पाई की जरूरत हो.
30 करोड़ डॉलर. क्या औकात है 30 करोड़ डॉलर की. पर अमरीका जैसा आदमी घटियापन पर उतर आए तो 30 डॉलर भी जात दिखाने के लिए बहुत हैं.
और भाईजी ये जो ट्रंप बार-बार जताता है कि अमरीका ने पाकिस्तान को पिछले 15 वर्ष में 33 अरब डॉलर दिए मगर पाकिस्तान ने हमें बेवकूफ बनाया, ये बताओ भाई साहब कि जो देश 30 करोड़ डॉलर की पगार बदमाशी से रोक ले उसने हमें 33 अरब डॉलर कब दिए कि पता ही न चला.
अच्छा चल दिए तूने 33 हज़ार करोड़ डॉलर अब तू हमसे वसूल करके दिखा दे.
अरे हम वो हैं जो नहाते समय पुराने साबुन के आखिरी टुकड़े को नए साबुन की बट्टी से जोड़कर इसलिए शरीर पर मल लेते हैं कि कहीं ज़ाया न हो जाए.
शैंपू की खाली बोतल में पानी डालकर आखिरी झाग तक निकाल लेते हैं. स्टील के सौ रुपये के गिलास को रेलवे स्टेशन के कूलर से पांच सौ रुपये की ज़ंजीर से इसलिए बांध देते हैं कि कोई चुरा न ले.
तू हमसे निकलवाएगा 33 अरब डॉलर.
भाई साहब ये जो परसों इस्लामाबाद आ रहा है न अमरीका विदेश मंत्री माइक पम्पू…
अब्दुल्ला, उसका नाम पम्पू नहीं माइक पोम्पियो है.
जो भी है पंपू, चंपू अपने इमरान ख़ान में अगर ज़रा भी गैरत है तो इस पंपू को मुंह पर कह दे कि जा अपने 30 करोड़ डॉलर की बत्ती बनाके जेब में डाल ले.
बना ले इस पैसे से एक और एम्पायर स्टेट बिल्डिंग. नहीं चाहिए हमें ये पैसा.
अबे कंगले सुपर पावर एक गरीब देश की मजदूरी खाता है. तेरे पेट में मरोड़ उठेगा. तू कहीं का न रहेगा.
अब्दुल्ला तुम ऐसे गुस्सा दिखा रहे हो जैसे अमरीका ने तुम्हारे पैसे दबा लिए हों. तुम तो ऐसे न थे.
भाई साहब बुरा न मानिएगा, खुदा न करे आपके बेटे का अमरीका का वीज़ा कभी रिजेक्ट हो जाए तब पूछूंगा कि अब्दुल्ला पनवाड़ी को इतना गुस्सा क्यूं आता है.
-वुसतुल्लाह ख़ान (पाकिस्तान से)

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