ब्रांडेड आभूषण कंपनी “तन‍िष्क” को द‍िखाया आइना… संघे शक्त‍ि कल‍ियुगे

धर्म एक ऐसा स्तंभ है जो क‍िसी भी देश, उसके नागरि‍कों, उसकी संस्कृत‍ि को न केवल सहेजता है, बल्क‍ि उन्हें न‍ियमों के बंधन में बांधकर उच्छृंखल होने से बचाता है और एक पूरे के पूरे समाज की अनेक थात‍ियों को अगली तमाम पीढ़‍ियों तक प्रवाह‍ित करता है। सनातन धर्म ऐसा सद‍ियों से वही करता आ रहा है। सबसे पुरानी संस्कृत‍ि का संवाहक होने के नाते इसे ही अन्य अनेक धर्मों के आक्रमणकार‍ियों का न‍िशाना भी इसील‍िए बनना पड़ा।

युद्ध चाहे मैदानों में लड़े जाते रहे हों या आज की तरह मानस‍िक व वैचार‍िक रूप से किंतु सनातन धर्म पर आघात अब भी जारी हैं। हालांकि संघे शक्त‍ि कल‍ियुगे ने कल अपना छोटा सा नमूना तब पेश क‍िया जब लव ज‍िहाद को प्रमोट करने वाला एक व‍िज्ञापन टाटा कंपनी की ब्रांडेड आभूषण कंपनी ‘तन‍िष्क’ हटाने पर बाध्‍य हुई।

वैसे सनातन धर्म पर आघात का ही उदाहरण हैं आए द‍िन होने वाली संतों-पुजार‍ियों की हत्याएं, लव ज‍िहाद की घटनाएं और धर्म-पर‍िवर्तन के ल‍िए ब्रेनवॉश की सतत प्रक्र‍िया ज‍िसे मीड‍िया के माध्यम से बखूबी अंजाम द‍िया जा रहा है। अभी तक तथाकथ‍ित तौर पर ‘धर्मन‍िरपेक्षी होने की कीमत’ चुकाते आ रहे हम, अब इस मीठे ज़हर को ‘चुपचाप’ पीने के ल‍िए राजी नहीं… कतई नहीं ।

ज्वेलरी ब्रांड तन‍िष्क द्वारा लव ज‍िहाद को प्रमोट करने वाला एड प्रसार‍ित करने पर हंगामा यूं ही नहीं मचा। तनिष्क ने अपने नये विज्ञापन में एक गर्भवती हिन्दू महिला को मुस्लिम के घर की बहू बताकर ये जताने का प्रयास किया है कि किसी मुस्लिम से निकाह करने वाली हिन्दू महिला को मुस्लिम घर में क‍ितना प्यार म‍िलता है और उसे ”ब‍िट‍िया की खुशी” मनाने का र‍िवाज़ बताकर प्रोत्साह‍ित क‍िया जाता है।

इस विज्ञापन के आते ही सोशल मीडिया में तनिष्क के प्रति लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके बाद सामूहिक रूप से तनिष्क के बहिष्कार की मुहिम ट्विटर पर चलाते हुए #BoycottTanishq अभियान छेड़ द‍िया गया। अंतत: तन‍िष्क को अपना एड हटाना पड़ा। कुछ समय पहले ही सर्फ एक्सेल ब्रांड ने भी इसी मानसिकता पर अपने विज्ञापन को प्रचारित किया था, उसका भारी विरोध हुआ था परंतु तब व‍िरोध की तीव्रता शायद कम रह गई थी।

व्यक्त‍िगत आज़ादी और कानूनी तौर पर क‍िसी मुस्ल‍िम से ह‍िंदू लड़की की शादी को सही ही माना जाएगा और होना भी यही चाह‍िए क्योंक‍ि ये व्यक्त‍िगत फैसला है परंतु बड़ा सवाल ये है क‍ि हमेशा ”ह‍िंदू लड़की ही क्यों”, और धर्मन‍िरपेक्षता की इतनी बड़ी कीमत हमेशा ह‍िंदू ही क्यों चुकाए क‍ि उनकी बेट‍ियों को न‍िशाना बनाया जाता रहे, कभी बरगलाकर तो कभी धमकाकर, और वह अब भी चुप रहे जबक‍ि इसके पीछे की सच्चाई NIA जैसी सर्वोच्च जांच एजेंसी भी बता चुकी हैं, क‍ि इसकी जड़ें कितनी गहरी हैं। ये स‍िर्फ शादी नहीं होती, इसके पीछे धर्मपर‍िवर्तन और परोक्ष रूप से लड़की के पर‍िवार व उससे पैदा हुए बच्चे तक एक लंबी श्रृंखला है ज‍िसे सुन‍ियोज‍ित तरीके से चलाया जा रहा है।

बहरहाल, अब जो थोड़ी चेतना स‍िर से ऊपर जाते पानी को रोकने के ल‍िए जागृत हुई है, वह बनी रहनी चाह‍िए। प्रश्न ये है क‍ि आख‍िर ह‍िंदू को ही क्यों सहनशील बनने की नसीहत देते हुए ये एड प्रसार‍ित क‍िये जा रहे हैं। अरे… ह‍िंदू तो दुन‍ियाभर में पहले से ही सहनशील माने जाते हैं, अब और क‍ितना। अब चेतने का समय है क्योंक‍ि अब उनकी न‍िगाहें हमारी बेट‍ियों पर आ गड़ी हैं।

अभी तक ज‍िस धर्मन‍िरपेक्षी चश्मे को हमारी आंखों पर चढ़ाकर हमें ”भाई भाई और सहनशीलता” का पाठ पढ़ाया गया, अब वही आत्मघाती होता जा रहा है। देश में सत्तापर‍िवर्तन के बाद इस चेतना को बल म‍िला तो उन ”घात‍ियों” को सहन नहीं हो रहा।
न‍िश्च‍ित रूप से व्यापार का कोई मत या मजहब नहीं होता परंतु अब जो कुछ भी दिख रहा है, वह लोगों को एक बार सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या सच में अब व्यापार भी धर्म देखने लगा है, वह भी लव ज‍िहाद को प्रमोट करके। इस आघात की शिकार अब तक हजारों लड़कियाँ हो चुकी हैं और इस से भी ज्यादा अभी इस जाल में फंसी हुई हैं। कहते हैं ना क‍ि संघे शक्त‍ि कल‍ियुगे, तो अब एकता का प्रमाण ट्व‍िटर ट्रेंड में ही नहीं, समाज के व‍िध्वंसक तत्वों तक भी पहुंचना चाह‍िए जो हमारी बेट‍ियों को बरगलाने में लगे हैं।

– सुम‍ित्रा स‍िंह चतुर्वेदी

http://abchhodobhi.blogspot.com/

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