8 सितंबर को ही जन्‍मे थे कला की हर विधा के महारथी भूपेन हजारिका

कला की हर विधा के महारथी भूपेन हजारिका का जन्‍म असम के तिनसुकिया जिला अंतर्गत सादिया गांव में 8 सितंबर 1926 को हुआ था।
कला की दुनिया के यात्री और खुद को यायावर बताने वाले संगीत-साहित्य के महाप्राण भूपेन हजारिका की कलम में ऐसी धार थी कि ‘दिल हूम हूम’ करे, इसी प्रकार संगीत की तान ऐसी कि कहीं दूर उठती लहरों की गूंज सरसराती हुई कानों के पास से निकल जाए। वह कला के हर क्षेत्र में लोक संस्कृति के रंग भरते हुए कवि, कहानीकार, गायक, लेखक संगीत निर्देशक, पत्रकार और फिल्मकार के रूप में अपनी यात्रा पर आगे बढ़ते रहे।
10 भाई-बहनों में सबसे बड़े भूपेन की मृत्‍यु 5 नवम्बर 2011 को हुई थी। उन्‍हें 70 वें गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया। उनके लिए यह सम्मान 8 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया।
मात्र 11 वर्ष की उम्र में उन्‍होंने ऑल इन्डिया रेडियो असम के लिए पहला गीत गाया और उसके कुछ ही समय बाद असमिया फिल्म इन्द्रमालती में बतौर बाल कलाकार अभिनय भी किया।
अमेरिका से आया रिसर्च के लिए बुलावा
लेखन और संगीत में रुचि के बावजूद उनकी पढ़ाई में कहीं कोई बाधा नहीं आई और उन्होंने गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से 1942 में इंटरमीडिएट और उसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। उन्हीं दिनों भूपेन दा को अमेरिका में मास कम्युनिकेशन पर रिसर्च करने का प्रस्ताव मिला। कोलंबिया विश्वविद्यालय में अपने पांच साल के शोध काल में भूपेन ने दुनिया की कई संस्कृतियों को करीब से देखा और उसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत के रंग भर दिए। भूपेन दा की कालजयी रचना ‘ओ गंगा बहिचे केनो’ (ओ गंगा बहती हो क्यों?) भी उन्हीं दिनों के संस्कृतियों के संगम का परिणाम थी।
प्यार, शादी और अलगाव
सात समंदर पार रहते हुए भूपेन की मुलाकात प्रियंवदा पटेल से हुई और दोनों ने 1950 में विवाह कर लिया। अमेरिका में ही उनके पुत्र तेज का जन्म हुआ। 1953 में वह अपने परिवार के साथ स्वेदश लौट आए और हजारिका ने कुछ समय तक गुवाहाटी विश्विवद्यालय में नौकरी की। इस बीच पत्नी के साथ उनका अलगाव हो गया और वह पूरी तरह से साहित्य और संगीत के हो गए। भूपेन हजारिका ने ‘दिल हूम हूम करे’, ‘हे डोला’ ‘ओ गंगा बहती हो क्यों’, ‘एक कली दो पत्तियां’ जैसे मशहूर गानों को संगीत दिया था।
फिल्मकार के रूप में भी उनका सफर बेहतरीन रहा। उन्हें असोम रत्न, संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 2011 में पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनके अलावा दादा साहब फालके पुरस्कार से भी भूपेन को नवाजा गया।
भूपेन हजारिका की लेखनी और आवाज देश की ऐसी धरोहर है, जो गंगा की धारा की तरह सदा अविरल रहेगी।
-एजेंसियां

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