अफगानिस्‍तान के हेलमंद में सेना और तालबानियों के बीच भीषण संघर्ष

काबुल। अफगानिस्‍तान के हेलमंद प्रांत में सरकारी सैन्यबलों और तालिबान लड़ाकों के बीच भारी लड़ाई चल रही है जिसके बाद वहाँ से हज़ारों परिवारों को अपने घर छोड़ भागना पड़ रहा है.
बुधवार को इस हिंसक संघर्ष का तीसरा दिन है. अफ़गान सैनिक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत की राजधानी लश्कर गाह को तालिबान के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
पिछले ही महीने अफगानिस्‍तान सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई थी. उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच पहली बार बड़ी लड़ाई छिड़ गई है.
अफ़ग़ान सैन्यबल तालिबान की हिंसा का जवाब दे रहे हैं और अमरीकी हवाई हमले उनकी जवाबी कार्यवाही में मदद कर रहे हैं.
इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के प्रमुख अमरीकी जनरल स्कॉट मिलर ने शांति वार्ता को नज़रअंदाज़ करने और फ़रवरी में हुए समझौते का उल्लंघन करने के लिए तालिबान की निंदा की थी.
भारी हिंसा के बीच हेलमंद और पड़ोसी कांधार प्रांत में बिजली की आपूर्ति बाधित है. तालिबान ने यहाँ सोमवार को एक पावर सब-स्टेशन पर हमला कर दिया था.
कई टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क भी ठप्प हो गए हैं. अनुमान है कि अब तक करीब 5,000 परिवारों या लगभग 35,000 लोगों को अपना घरों से भागना पड़ा है. इनमें से कई लोगों के पड़ोस में शरण लेने की ख़बर है.
एक परिवार ने बताया कि उन्होंने जो कपड़े पहने हुए थे उन्हीं में लश्कर गाह स्थित अपना घर छोड़ना पड़ा. परिवार को ये तक नहीं मालूम था कि कि उन्हें सोने के लिए भी कोई सुरक्षित जगह मिलेगी या नहीं.
कुछ अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें डर है कि कहीं वो भूख से मर जाएँ. स्थानीय अस्पताल ने बताया कि वहां दर्जनों घायल लोगों को भर्ती कराया गया है.
अफ़ग़ान-तालिबान शांति वार्ता और तालिबान-अमरीका का समझौता
तालिबान का यह हमला और हिंसा इसलिए भी ज़्यादा चिंताजनक है क्योंकि पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों को देखकर अमन की थोड़ी ही सही मगर उम्मीद ज़रूर जताई जा रही थी.
इसी साल फ़रवरी में 18 वर्षों के ख़ूनखराबे और युद्ध के बाद अमरीका और तालिबान ने ‘शांति बहाली के लिए समझौता’ किया था.
इस समझौते के तहत अमरीका और नेटो सहयोगियों ने यह वादा किया था कि अगर तालिबान के लड़ाके समझौते का पालन करते हैं तो वो 14 महीनों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुला लेंगे.
समझौते के तहत तालिबान अपने नियंत्रण वाले इलाकों में अल-क़ायदा या किसी अन्य चरमपंथी समूह को न पहुंचने देने पर भी सहमत हुआ था.
इधर, कई महीनों की देरी के बाद आख़िरकार क़तर में अफ़ग़ानिस्तान-तालिबान शांतिवार्ता की शुरुआत हुई थी.
इस ऐतिहासिक शांतिवार्ता से बरसों से युद्ध के साये में घिरे अफ़ग़ानिस्तान के लिए कई उम्मीदें जताई जा रही थीं लेकिन अब हेलमंद में जारी हमलों के बाद ये उम्मीदें भी धुंधली पड़ गई हैं.
-BBC

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