8 रूसी राजनयिकों को कुछ इस तरह छोड़ना पड़ा उत्तर कोरिया

प्‍योंगयांग। सनकी तानाशाह किम जोंग उन के देश उत्तर कोरिया में तैनात रूसी राजनयिकों ने कभी सपने भी नहीं सोचा होगा कि उन्‍हें पैदल ‘ट्रेन’ दौड़ानी पड़ सकती है। रूसी राजनयिकों को परिवार के साथ इस अजीबोगरीब परिस्थिति का सामना करना पड़ा। इन रूसी राजनयिकों उत्तर कोरिया से निकलने के लिए हाथों से खींचे जाने वाली रेल ट्रॉली की मदद से उत्तर कोरिया को छोड़ना पड़ा। इस दौरान करीब एक किलोमीटर तक रूसी राजनयिकों को यह ट्रॉली रेलवे ट्रैक पर खुद ही खींचनी पड़ी।
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस को लेकर उत्‍तर कोरिया में उठाए सख्‍त कदमों की वजह से 8 रूसी राजनयिकों को इस तरह से प्‍योंगयांग को छोड़ना पड़ा। ये लोग पहले ट्रेन से आए और बस से सफर किया। इसके बाद उन्‍हें रूसी सीमा तक करीब एक किमी की दूरी हाथ से खींचे जाने वाली रेल ट्रॉली की मदद से पूरा किया। रूसी राजनयिक खुद ही धक्‍का देकर रेल ट्रॉली को रूसी सीमा तक लेकर गए।
उत्तर कोरिया का दावा, कोरोना का कोई मामला नहीं
दरअसल, उत्तर कोरिया ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सभी यात्री ट्रांसपोर्ट को सीमित कर दिया है। उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि उसके यहां कोरोना वायरस का कोई मामला नहीं है लेकिन विश्‍लेषक उसके इस दावे को खारिज करते हैं। पिछले साल से ही ट्रेनों को देश छोड़ने या देश में आने की अनुमति नहीं है। यही नहीं अंतर्राष्‍ट्रीय उड़ानों को भी रोका गया है।
उत्तर कोरिया में इस बैन की वजह से रूसी राजनयिकों को जाने के लिए मजबूरन यह असामान्‍य रास्‍ता अपनाना पड़ा। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा, ‘चूंकि एक साल से भी ज्‍यादा समय से सीमाएं बंद हैं और यात्रियों का आवागमन रुका हुआ है, इस वजह से राजनयिकों को घर वापसी के लिए यह लंबा और कठिन रास्‍ता अपना पड़ा है।’
राजनयिकों को खुद ही सूटकेस से भरे रेल ट्रॉली को खींचना पड़ा
रूसी विदेश मंत्रालय के फोटो में नजर आ रहा है कि राजनयिकों को खुद ही अपने सूटकेस से भरे रेल ट्रॉली को खींचना पड़ा। इस दल में एक तीन साल की बच्‍ची वराया भी थी। वहीं रूसी सीमा पहुंचने पर रूस के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उनका स्‍वागत किया। इसके बाद रूसी राजनयिक बस से व्‍लादिवोस्‍तोक एयरपोर्ट गए।
-एजेंसियां

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