कुत्ते के नाम पर एक साल से राशन सामग्री ले रहे थे 75 वर्षीय बुजुर्ग, जांच में खुलासा

इंदौर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पिछले एक साल से एक बुजुर्ग अपने बेटे राजू के नाम पर राशन लेते आए थे। जब जांच हुई तो सामने आया कि उनका बेटा राजू इंसान नहीं, बल्कि उनका पालतू कुत्ता है। मामला मध्य प्रदेश के धार जिले के एक दूरवर्ती गांव का है जहां के निवासी नरसिंह बोडार (75) अपने ‘बेटे’ के नाम पर पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) कोटा से उपलब्ध 60 किलो राशन घर लाते रहे हैं।
लेकिन जब पीडीएस अधिकारी उनके घर गए और राजू को बुलाया, तो वह पूंछ हिलाते हुए बाहर आया। यह देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तब जाकर सामने आया कि नरसिंह एक साल से ज्यादा समय से अपने पालतू कुत्ते राजू के नाम पर राशन लाते थे जिसमें 60 किलो गेहूं और चावल होता था। धार के खाद्य अधिकारी आनंद गोले ने बताया कि बोडिया पंचायत में उचित मूल्यों की दुकान स्थित है।
‘ओह, वह तो मेरा कुत्ता है…’
उन्होंने आगे बताया, ‘नरसिंह ने करीब एक साल पहले राशन कार्ड में अपनी पत्नी और ‘बेटे’ राजू का नाम लिखाया है जो उनका कुत्ता निकला।’ सोमवार को नरसिंह हफ्तेभर का राशन लेने के लिए दुकान पर आए। इस बार ऑर्डर के लिए सेल्समैन कैलाश मारू ने अपनी और परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड दिखाने को कहा। नरसिंह के पास उनका और उनकी पत्नी का आधार था।
जब कैलाश ने राजू के बारे में पूछा तो उनकी जुबां से निकला, ‘ओह, वह तो मेरा कुत्ता है।’ इसके बाद कैलाश ने अधिकारियों को इसकी सूचना दी और जांच करने का फैसला लिया। शुरुआती जांच में सामने आया कि राशन कार्ड पंचायत ऑफिस में तैयार किए गए थे। गोले ने बताया, ‘हम इसकी जांच कर रहे हैं। उचित कार्यवाही होगी।’ दरअसल आधार नंबर समग्र पोर्टल में अपडेट कर दिए गए हैं इसलिए लाभार्थियों को वेरिफिकेशन के लिए अपना आधार कार्ड दिखाने को कहा गया था।
-एजेंसियां

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