अर्थ गंगा थीम पर हुई 5वीं इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट, जलशक्ति मंत्री ने क‍िया उद्घाटन

नई द‍िल्ली। देश भर में जल निकायों, स्थानीय नदियों के व्यापक विश्लेषण और प्रबंधन समेत जल सुरक्षा और प्राकृतिक जल निकायों के कायाकल्प पर चर्चा के लिए एनएमसीजी और Center for Ganga River Basin Management and Studies ने मिलकर 5वें इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया। कोरोना संकट के चलते इस बार समिट को वर्चुअल तरीके से आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। कार्यक्रम की थीम “अर्थ गंगा ( Arth Ganga) ” थी। इसलिए इस बार राष्ट्रीय नदी गंगा से संबंधित आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही नदी क्षेत्र में रोज़गार के अवसर को बढ़ाने के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि नमामि गंगे मिशन नदियों के संरक्षण का सबसे बड़ा मिशन है और इसका उद्देश्य सिर्फ गंगा नदी की स्वच्छता नहीं है बल्कि यह समग्र नदियों की स्वच्छता पर केंद्रित है, जो नदियों के कायाकल्प की दिशा में एक बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। उन्होने कहा कि इस बार पिछले समिट के सुझावों की विस्तृत समीक्षा के साथ ही नए निर्णय लिए जाएँगे। सरकार के विजन को साझा करते हुए श्री शेखावत ने बताया कि हम एक ऐसे इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जहां पारिस्थितिक संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देंगे। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विजन के अनुरूप हम राष्ट्रीय नदी गंगा के संरक्षण अलावा इसे अर्थव्यवस्था के साथ भी जोड़ रहे हैं। हम “अर्थ गंगा” परियोजना की को बढ़ावा देने और इसके प्रसार के विषय पर भी तेजी से कार्य कर रहे हैं।

5वें इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट पर बोलते हुए उन्होंंने कहा कि यह समिट जल क्षेत्र में भारत के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होने कहा कि नदी संरक्षण और विकास से जुड़े हुए बड़े उद्देश्यों के साथ-साथ स्थानीय नदियों और जल निकायों के प्रबंधन में सामने आ रही जटिलताओं को सुलझाने के लिए भी यह समिट एक बेहतर मंच है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार देश के सभी लोगों को पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने देश के सभी ग्रामीण घरों में नल द्वारा पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन की शुरुआत की है। यह एक विशाल कार्य है, लेकिन हम इस मिशन को भी तय समय में प्राप्त करेंगे।

State minister for Jalshakti Ministry ratanlal kataria at 5th India Water Impact Summit 

कार्यक्रम के अगले चरण में जल शक्ति राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया ने ज़ोर देते हुए कहा कि केंद्र की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सतत विकास की दिशा में काम कर रही है। उन्होने कहा कि इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि हमने सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही विकसित किया है।

जल शक्ति मंत्रालय के सचिव यू.पी. सिंह ने जल उपयोग के विषय पर बात करते हुए कहा कि आज जल की मांग करने वाले पक्ष और आपूर्ति पक्ष दोनों को ही बेहतर जल प्रबंधन की ज़रूरत है, उसी स्थिति में नदी का कायाकल्प संभव है। उन्होने जल संचयन और संरक्षण के लिए 5R यानि रीसायकल,रीयूज़, रिड्यूस, रिचार्ज (भूजल संचयन) और रिस्पेक्ट मतलब जल के आदर की बात कही। उन्होने कहा कि इन्हीं एलीमेंट की मदद से जल को आसानी से संरक्षित और संचित किया जा सकता है।

नमामि गंगे कार्यक्रम को आकार देने और उसके सुदृढ़ ढांचे के निर्माण में IIT के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा,“ज्ञान गंगा पहल के साथ हम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ जुड़ रहे हैं, ताकि उनसे बेहतर ज्ञान और अनुभव हासिल कर सकें।” उन्होंने साझा किया कि यह समिट कृषि, नदियों के किनारे मानव आवास (शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में), पर्यटन, ऊर्जा और बाढ़ प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करने और उन्हें सुलझाने की पूरी कोशिश करेगा। आईआईटी कानपुर के प्रो. विनोद तारे ने प्रधानमंत्री जी के विजन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होने कहा कि “नदी संरक्षण कई लोगों को रोजगार देने वाली एक आर्थिक गतिविधि है और जो जीडीपी में योगदान दे रहा है।” उन्होने कहा कि गंगा देश की सभी नदियों और जल निकायों का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए, गंगा के कायाकल्प से अन्य नदियों और जल निकायों के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

15 दिसंबर तक चलने वाली यह 5वीं इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट, भारत की कुछ सबसे बड़ी जल संबंधी समस्याओं पर चर्चा करने और इसके समाधान हेतु उपयुक्त मॉडल विकसित करने के लिए सभी हितधारकों जैसे सरकार, सिविल सोसाइटी, वैज्ञानिक, विद्वान, और शोधकर्ताओं को एक साथ एक मंच पर लेकर लाएगी। वहीं, इस बार नदियों के संरक्षण एवं संवर्धन की चुनौतियों से जूझ रहे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे गंगा बेसिन राज्यों की समीक्षा पर भी जोर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि एनएमसीजी के तत्वावधान में गठित किया गया सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज एक थिंक टैंक की तरह कार्य करता है, जिसका उद्देश्य भारत को नदी एवं जल विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी बनाना है। इस संस्थान का मुख्यालय IIT कानपुर में है, और इसमें देश और विदेशों के प्रमुख विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
-Legend News

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