56 भोग से नहीं, 11आइटम से रुकेगी भोजन की बरबादी

विश्व में लोगों को पौष्टिक भोजन तो दूर 2 वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है| यह समस्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है क्योंकि एक तरफ़ कृषि उत्पाद कम है दूसरी तरफ़ विश्व की आबादी सुरसा की तरह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है| यह स्थिति विकासशील देश हो या विकसित देश इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है|

दुनिया भर में आज भी हजारों लोग भरपेट भोजन ना मिलने के कारण या तो कुपोषण के शिकार हो जाते है या भुखमरी से मर जाते हैं। सबको पौष्टिक व संतुलित भोजन मिले इसी बात को मद्देनजर रखते हुए प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्यान्न दिवस के रूप में मनाया जाता है|

विश्व में सभी देश के विकास के लिए आवश्यक है देश के नागरिकों (मनुष्य) का पौष्टिक भोजन से ही सर्वोगिक विकास संभव है| इसलिए विश्व में सभी लोगों को संतुलित भोजन इतनी मात्रा में मिले कि वह कुपोषण के ना तो शिकार हो और ना ही भुखमरी से मरे साथ ही एक स्वस्थ जीवन जी सकें।इसके लिए आवश्यक है विश्व में खाद्यान्न उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में हो साथ ही खाद्यान्न या पका हुआ भोजन खराब ना हो हम सभी जानते हैं खाद्यान्न बड़ी मेहनत से पूरे विश्व में कृषकों द्वारा उपजाया जाता है |उसकी उपज की एक सीमा होती है हालांकि दुनिया में तमाम तकनीक इस्तेमाल के बाद भी आज दुनिया की भोजन की जरूरत को विश्व के कृषक पूरा करने का अथक प्रयास करते हैं|

विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या सीमित खाद्यान्न पदार्थों का उत्पाद और सीमित भंडारण को देखते हुए खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की ना केवल जरूरत महसूस की गई बल्कि कृषि तकनीकी को बढ़ाया जाये ,इसी बात को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर 1945 को रुस में खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ ए ओ ) की स्थापना की ताकि संसार में व्याप्त भुखमरी के प्रति लोगों मे जागरूकता फैलाने एवं खाद्य समस्या को खत्म करने के लिए सन 1980 से प्रतिवर्ष विश्व खाद्यान्न दिवस का आयोजन शुरू किया गया ।

खाद्य और कृषि संगठन के अलावा विश्व के अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे विश्व खाद्य प्रोग्राम व अंतरराष्ट्रीय कोष भी कृषि के विकास हेतु इस आयोजन में सहायता प्रदान करते हैं|।हम सभी जानते हैं भारत कृषि प्रधान देश होते हुए भी आज अन्य देशों की अपेक्षा हमारे देश के बच्चे और नागरिक भोजन के अभाव में बड़ी तादाद में या तो मर जाते हैं या कुपोषण का शिकार हो जाते हैं| भारत में

पहले अन्न का एक दाना भी खराब करने का मतलब अन्न देवता और भगवान को रुष्ट करना होता था| आज आर्थिक उन्नति के साथ कुछ धनाडय लोग अगर अन्न की बर्बादी नही करे तो भारत की 50 फीसदी अन्न अभाव की समस्या से निपटाया जा सकता है |आप अक्सर देखते होंगे जिस तरीके से भारत में शादी विवाह या अन्य उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है उसमें खाघ की बहुत बड़ी तदात में बर्बादी देख कर संवेदनशील का दिल रो पड़ता है| आज अगर हम उस बर्बादी को रोक दें तो यह एक देव तुल्य कार्य होगा ।आप आज विश्व खाद्य दिवस पर एक संकल्प लें की थाली में आप ना झूठा छोड़ेंगे ना ही अपने पड़ोसी को थाली में झूठा छोड़ने देंगे ।किसी एक भूखे को भूखा नही सोने देंगे ।आज खाने की बर्बादी व आर्थिक अपव्यय रोकने के लिए ले *संकल्प 56भोग नहीं 11आइटम होंगे ताकि खाना बर्बाद ना हो ।* किसी ने सच कहा है हे प्रभु पहले दे पड़ोसी की थाली में फिर दे मेरी थाली में |साई ईतना दिजिये जामे कुटुम समाय मैं भी भूखा ना रहूं साधु ना भूखा जाए **

– राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोक स्वर आगरा

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