कानपुर में हुए सिख दंगों से जुड़े 35 मामलों की फिर से जांच होगी

लखनऊ। कानपुर में हुए सिख दंगों से जुड़े कुल 1254 मामलों में से 35 की फिर से जांच की जाएगी। इन सभी मामलों में साक्ष्य के अभाव में कानपुर पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
हत्या, लूट और आगजनी के इन मामलों में स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) आगे की विवेचना करेगी। सिख दंगों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने 1254 एफआईआर में इन 35 मामलों को आगे की विवेचना के लिए चुना है।
सुप्रीम कोर्ट ने मनजीत सिंह की याचिका पर प्रदेश सरकार को कानपुर के बजरिया और नजीबाबाद थानों में सिख दंगों के दौरान दर्ज हुए मामलों की जांच के लिए एसआईटी के गठन के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही दोनों थानों में दर्ज उन मुकदमों की भी दोबारा विवेचना के निर्देश दिए, जिनमें साक्ष्यों के अभाव में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी।
सरकार ने लोकसभा चुनाव-2019 से पहले पांच फरवरी को इसके लिए पूर्व डीजीपी अतुल की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। इसमें सदस्य के रूप में रिटायर्ड जिला जज सुभाष चंद्र अग्रवाल, रिटायर्ड अपर निदेशक (अभियोजन) योगेश्वर कृष्ण श्रीवास्तव और एसपी बालेन्दु भूषण सिंह को शामिल किया गया है। एसआईटी ने 1984 में सिख दंगो के दौरान दर्ज हुए 1254 मामलों के रेकॉर्ड खंगाले।
पड़ताल में सामने आया कि पुलिस ने 153 मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी और 1101 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। एसआईटी ने 1254 में उन 39 मामलों को छांटा, जिनमें हत्या, लूट, डकैती और आगजनी जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुए थे। इनमें चार मामलों में तो चार्जशीट दाखिल हुई थी जबकि बाकी 35 मामलों में साक्ष्य न मिलने की बात कहकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। एसआईटी ने इन्हीं मामलों को आगे की विवेचना के लिए चुना है। जल्द एसआईटी दोबारा जांच की इजाजत के लिए कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत अर्जी दाखिल करेगी।
दिल्ली के बाद सबसे भयावह थे कानपुर के सिख दंगे
दिल्ली के बाद कानपुर में सिख दंगे सबसे भयावह थे। कानपुर के दंगों में 300 से ज्यादा सिखों के मारे जाने और सैकड़ों घर तबाह होने के आरोप लगे थे। हालांकि, सिख दंगों की जांच करने वाले रिटायर्ड जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग ने दंगों में 127 मौतें होने की बात कही थी।
छह महीने में पूरी करनी है जांच
कानपुर की शहर कोतवाली के प्रथम तल पर एसआईटी का दफ्तर बनाया गया है। एसआईटी के अध्यक्ष अतुल ने बताया कि कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद एसआईटी छांटे गए 35 मुकदमों की पड़ताल शुरू करेगी। जानकारी के मुताबिक, एसआईटी मुकदमों के पुराने रेकॉर्ड, पीड़ित और गवाहों के बयानों का अध्ययन करेगी। एसआईटी उन चार मुकदमों के स्टेटस के बारे में भी पता करेगी, जिनमें पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। 35 मुकदमों की आगे की पड़ताल के लिए इंस्पेक्टर, एसआई, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल की टीम जुटा रही है। इसके अलावा अभियोजन निदेशालय से दो अभियोजन अधिकारियों की भी मांग की गई है। एसआईटी को जांच पूरा करने के लिए छह माह का समय दिया गया है।
इन बिंदुओं पर होगी पड़ताल
. सिख दंगों के दौरान दर्ज हुईं उन एफआईआर का परीक्षण, जिनमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई हो।
. परीक्षण में जघन्य अपराध के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
. अगर किसी मामले में आगे की विवेचना की जरूरत दिखती है, तो सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत अग्रिम विवेचना एसआईटी करेगी।
. एसआईटी सिख दंगों से जुड़े उन मामलों का भी परीक्षण करेगी, जिनमें आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया हो।
. अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, जिसमें जरूरत के बावजूद रिट या अपील न की गई हो, उनमें सक्षम कोर्ट में रिट या अपील करने के लिए एसआईटी की तरफ से संस्तुति की जाएगी।
-एजेंसियां

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