SC-ST एक्ट में 23 युवक निर्दोष साब‍ित, फर्ज़ी र‍िपोर्ट करने वाले पर चलेगा केस

हाथरस। देश में एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग राजनीतिकरण और निजी रंजिशों के चलते क‍िये जाने से इस कानून की अहम‍ियत संद‍िग्‍ध होती जा रही है।

आज हाथरस की SC-ST कोर्ट के ने 6 वर्ष बाद 23 युवकों को दलितों पर अत्याचार के मामले में बरी किया गया। 6 वर्ष बाद इन सभी लोगों के विरुद्ध कोई सबूत न होने के कारण इन्हें निर्दोष पाया गया है। सभी युवक जाट थे और रंज‍िशन उन पर SC-ST एक्‍ट के तहत ये मामला चल रहा था ज‍िस पर जस्टिस अनुराग पंवार ने अपने निर्णय में सभी 23 लोगों को निर्दोष माना है।

इसके साथ ही फर्ज़ी मुकदमा करने को लेकर कथित पीड़ित रामवीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायलय ने पीड़ित पक्ष पर धारा 344 के तहत नोटिस जारी करने का आदेश सुनाया है। धारा 344 तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति मिथ्या तथ्यों के माध्यम से किसी को जेल पहुंचाने का प्रयास करता है। इसमें दोषी पाए जाने पर 3 वर्षो की सजा का प्रावधान है।

प्राप्‍त समाचार के अनुसार वर्ष 2016 में हाथरस के थाना मुरसान के अंतर्गत आने वाले विशुनदास के 23 लोगों पर रामवीर ने दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने तहरीर पर सभी लोगों के खिलाफ आईपीसी 323, 325, 504, 506, 452 व 3(1)x एससी एसटी एक्ट में FIR दर्ज की थी।

पीड़ित पक्ष का आरोप था कि आरोपियों ने होली की रात करीब 10 बजे डीजे पर नाचने को लेकर उनपर हमला कर दिया था। दोनों पक्षों की प्रधानी के चुनाव को लेकर रंजिश चली आ रही थी।

रामवीर ने आरोप लगाया था कि 23 मार्च 2016 को रात में 10 बजे आरोपियों ने एक राय होकर उन्हें पीटा था। साथ ही जातिसूचक शब्दों से अपमानित भी किया था। जाटव समाज से आने वाले रामवीर ने कुल 23 लोगों को नामज़द किया था जोकि जाट जाति से आते हैं।
– Legend News

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