2+2 डायलॉग: बैठक में रक्षा संबंधी कई समझौते करेंगे अमेरिका और भारत

वॉशिंटन/दिल्ली। अमेरिका और भारत इस हफ्ते होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में कई रक्षा संबंधी समझौते करेंगे। इन समझौतों के जरिये दोनों देश की मिलिटरी आपसी सहयोग को बढ़ाना चाहेगी। साथ ही दोनों देश इस क्षेत्र में चीन के हस्तक्षेप को भी कम करना चाहेंगे। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से 2+2 डायलॉग के तहत दिल्ली में 6 सितंबर को मुलाकात करेंगे।
बता दें कि बहुप्रतीक्षित 2+2 डायलॉग इस साल पहले ही 2 बार रद्द किया जा चुका है। यह भारत और अमेरिका के बीच सबसे उच्चस्तरीय बैठक है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पिछले साल जून में अमेरिका की यात्रा पर गए थे तो दोनों पक्षों ने संवाद के इस नए प्रारूप पर सहमति जताई थी
अधिकारियों का मानना है कि यह बैठक न सिर्फ सांकेतिक रूप से दोनों ही देशों के बहुत महत्वपूर्ण है बल्कि इसके जरिए दोनों ही देश अपने मनमुटाव दूर करने की कोशिश करेंगे। इनमें भारत के रूस और ईरान के साथ संबंध से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
अमेरिकी मिलिटरी अफसर मरीन जेनरल जेसेफ डनफोर्ड ने कहा कि दोनों देशों की सहभागिता और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए 2+2 डायलॉग एक ऐतिहासिक कदम है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध काफी मजबूत हुआ है। भारत ने चीन द्वारा दक्षिण एशिया में किए जा रहे रक्षा और आर्थिक लिंक को लेकर आगाह भी किया था। यूएस डिफेंस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि दोनों देश जल, थल और वायु इन तीनों जगह कई महत्वूर्ण जॉइंट एक्सरसाइज करने की सोच रही हैं।
इन मुद्दों के अलावा दोनों देश इस बैठक में अपनी असहमतियों को लेकर भी चर्चा करेंगे। अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान और रूस पर लगे प्रतिबंधों को लागू करे। भारत द्वारा रूस के सर्फेस टू एयर मिसाइल S-400 खरीदे जाने को लेकर भी अमेरिका चिंतित है।
अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं जिसके तहत रूस के साथ डिफेंस और इंटेलिजेंस सेक्टर में संबंध रखने वाले देश भी अमेरिका द्वारा इन प्रतिबंधों का सामना कर सकते हैं। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इन मिसाइलों की खरीद को लेकर रूस के साथ भारत की बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अगर ईरान की बात करें तो अमेरिका दूसरे देशों को वहां से तेल न खरीदने का दबाव डाल रहा है। ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध 4 नवंबर से फिर शुरू होनेवाले हैं। चीन के बाद भारत ईरान से तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।
-एजेंसी

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