1945 में 2 सितंबर को ही हुआ था दूसरे विश्व युद्ध का समापन

2 सितंबर, 1945 को जापान के विदेश मंत्री मामोरू शेगेमित्सू ने द्वितीय विश्वयुद्ध में आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया था। माना जाता है कि इसके बाद ही दूसरे विश्व युद्ध का आखिरकार समापन हुआ।
आइये इस मौके पर जानते हैं दूसरे विश्व युद्ध की रोचक बातें…
युद्ध शुरू होने की तारीख पर सस्पेंस
अधिकतर इतिहासकारों का मानना है कि दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत 1 सितंबर, 1939 को पोलैंड पर जर्मनी के हमले के साथ हुई। कुछ का मानना है कि युद्ध तब शुरू हुआ जब जापान ने 18 सितंबर, 1931 को मंचूरिया पर हमला किया। कुछ की राय है कि दरअसल यह पहले विश्व युद्ध का ही हिस्सा था, बीच में सिर्फ थोड़ा ब्रेक दिया गया था।
​7 दिसंबर, 1941 का महत्व
जापानी सेना ने पर्ल हार्बर पर 7 दिसंबर, 1941 को हमला किया था। इस हमले का मास्टरमाइंड एडमिरल इसोरोकु यमामोतो था। इस हमले से अमेरिका भड़क गया और उस समय तक तटस्थ रहे अमेरिका ने भी जंग में कूदने का फैसला लिया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि संयुक्त राज्य की मौजूदगी ने युद्ध का नक्शा बदल दिया।
मानव इतिहास का सबसे बड़ा हमला
6 जून, 1944 को फ्रांस के नॉरमंडी इलाके की पांच बीचों पर हमला किया गया था। इस ऑपरेशन का कोडनेम ओवरलॉर्ड था। बीचों का कोडनेम उटाह, ओमाहा, गोल्ड, जुनो और सॉर्ड था। हमलावर फोर्स में 7,000 जहाज और लैंडिंग क्राफ्ट शामिल थे जिन पर मित्र देशों के नौसेना के 1,95,000 जवान तैनात थे। जल, थल और हवा के रास्ते होने वाला इसे मानव इतिहास का सबसे बड़ा हमला बताया जाता है। इस ऑपरेशन को डूम्स-डे या डी-डे के नाम से भी जाना जाता है। डूम्स डे वाले दिन इंग्लैंड, कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स के 1,33,000 सैनिक युद्ध में उतरे।
जापान का नगासाकी पर नहीं होना था हमला
अमेरिका ने जापान के जिन शहरों पर हमला करने के लिए लिस्‍ट बनाई थी उनमें नागासाकी शामिल नहीं था। इस लिस्‍ट में कोकुरा, हिरोशिमा, योकोहामा, निगाटा और क्‍योटो था। बाद में 25 जुलाई को क्‍योटो की जगह नागासाकी ने ले ली। अमेरिका के युद्ध मंत्री हेनरी एल स्टिमसन ने आखिरी वक्‍त में क्‍योटो की जगह नागासाकी को शामिल किया। दरअसल उन्‍होंने क्‍योटो में अपना हनीमून मनाया था, इस वजह से उन्‍हें क्‍योटो से लगाव था। यही वजह थी कि उन्‍होंने क्‍योटो को टारगेट शहरों की सूची में से हटवा दिया था।
कौन थे कमीकाजी पायलट?
कमीकाजी पायलट असल में जापान का हवाई आत्मघाती दस्ता था। जब जापान को अपनी हार करीब लगने लगी तो उसने कमीकाजी नाम का दस्ता बनाया। कमीकाजी का जापानी में ‘दिव्य हवा’ मतलब होता है। इसका जापान के इतिहास में काफी महत्व है। इन पायलट्स को अपने जहाज को दुश्मन के युद्धपोतों से टकराना होता था। जापान को अपने इस मिशन में बहुत हद तक सफलता भी मिली। प्रशांत महासागर में कमीकाजी पायलट्स ने 40 अमेरिकी जहाजों को डुबो दिया। फिलीपींस में दुश्मन के 16 और जहाज डुबो दिए गए।
स्टैलिनग्रैड की अहमियत
अगस्त 1942 से फरवरी 1943 तक हुई स्टैलिनग्रैड की लड़ाई दूसरे विश्व युद्ध में टर्निंग पॉइंट रही और इसे मानव इतिहास की सबसे खूनी लड़ाई माना जाता है। जर्मनी ने स्टैलिनग्रैड पर कब्जा कर लिया था। सोवियत यूनियन के जवाबी हमले में जर्मनी और धुरी राष्ट्र के सैनिकों की बड़ी संख्या में मौत हुई। कुल कैजुअल्टी की संख्या 10 से 20 लाख थी।
हिटलर की मूंछ की कहानी
पहले विश्व युद्ध का समय था। हिटलर एक खंदक में फंसा हुआ था। उस समय ही गैस अटैक हो गया। उस वक्त उस की मूंछें बड़ी थीं। गैस से बचने के लिए उसने जो गैस मास्क लगाई, वह मूंछों में फंस गई और मास्क को उतारने के लिए काफी जद्दो-जहद करनी पड़ी। इस घटना के बाद उसने अपनी मूंछें दोनों तरफ से कटवा लीं।
3,000 बच्चों की डिलिवरी
होलोकास्ट के दौरान पोलैंड की कैथोलिक मिडवाइफ स्टैनिसलावा लिसजिंसका ने ऑश्विट्स कॉन्सट्रेशन कैंप में 3,000 बच्चों की डिलिवरी कराई।
अन्य रोचक फैक्ट्स
1. यह बात थोड़ी अटपटी जरूरी लगेगी लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ऐसा होता था। सैनिकों को राशन में टॉयलट पेपर मिलते थे। ब्रिटिश सैनिकों को रोजाना तीन शीट और अमेरिकी सैनिकों को 22 शीट मिलती थी।
2. 1923 में सोवियत यूनियन में जिन पुरुषों का जन्म हुआ था, उनमें से सिर्फ 20 फीसदी पुरुष जिंदा रहे।
3. दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिकी सेना में सबसे कम उम्र का सैनिक कैल्विन ग्राहम था जिसकी उम्र 12 साल थी। अमेरिकी नौसेना को जॉइन करते समय उसने उम्र को लेकर झूठ बोला था। जब तक वह जख्मी नहीं हो गया, उसकी असल उम्र का पता नहीं चला था।
4. हिटलर का भतीजा विलियम हिटलर अमेरिकी नौसेना में था।
5. मित्र देशों ने जो पहला बम गिराया था उससे बर्लिन के चिड़ियाघर में सिर्फ एक हाथी की मौत हुई।
6. 1939 और 1945 के बीच मित्र देशों ने 34 लाख टन बम गिराए यानी हर महीने 27,700 टन बम गिराए गए।
-एजेंसी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »