13 नवम्बर: 1998 से मनाया जा रहा है विश्व दयालुता दिवस

दलाई लामा जी के इन शब्दों का अर्थ है विश्व में हर धर्म में व समाज में सबसे बड़ा धर्म दयालुता का धर्म माना गया है| यह एक ऐसी शक्ति व आकर्षण है जो दूसरे को खुशी और आपको ख़ुशी के साथ गमों को हरण करता है| विश्व में दयालुता के लिए विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत 1998 में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट संगठन द्वारा 13 नवम्बर को की गई थी| इसकी स्थापना 1997 में टोक्यो के सम्मेलन में दुनिया भर के दयालु संगठनों द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य था सकारात्मक शक्ति और दया की डोर जो समाज में अच्छे कामों को करने के लिए प्रेरित करें| । दुनिया भर में तमाम एनजीओ संगठन को स्विस कानून के तहत अधिकारिक एनजीओ के रूप में पंजीकृत किया गया था|

वर्तमान में काइंडनेस मूवमेंट में 28 से अधिक राष्ट्र शामिल हैं जिनका किसी भी धर्म व राजनीति मूवमेंट से संबंध नहीं है ।देश दयालुता के धर्म को और उसके आकर्षण को समझते हुए अपने समाज में उसका प्रचार प्रसार करते हैं| दयालुता यह एक ऐसा गुण है जो विश्व के सभी लोगों के लिए खुशनुमा माहौल बनाता है| इस मानवीय गुणों के बिना दुनिया में दुखों का रेगिस्तान बन जायेगा| जब आप किसी पर दया करते हैं तो उसका मीठा फल व उसके साथ आपको व समाज को उससे अधिक ख़ुशी होती है| यह चारों ओर संपन्नता व खुशी की खुशबू फैलाता है |संपन्न व सक्षम व्यक्ति द्वारा समाज में जरूरतमंद के लिए दया दिखाना चाहे वह वस्तु ,शब्दों ,सेवा , क्षमा, अनुभव आदि के रूप में हो ।दयालुता के लिए आपको कही बाहर नही जाना है| आपके आस पास अनेक प्रकार से दयालुता के अवसर होते हैं ।

समाज में आर्थिक संपन्नता से जो सुख या सम्मान मिलता है वह दयालुता से बड़ा नहीं होता ।परमात्मा दयालुता दिखाने वाले पर अपने रहमों करमो के आशीर्वाद से वर्षा करता है चाहे वह स्वास्थ्य ,आर्थिक ,बच्चों के उठान, परिवार की खुशी हो इससे भी बड़ी बात है कि दया करने पर आत्म संतोष होता है ।दयालुता का धर्म दोनों के लिए कल्याणकारी होता है।भारत में सदियों से सभी धार्मिक पुराणों में लिखी बात जॉन रस्किन के इन शब्दों से आप दयालुता का बड़ा विचार समझ सकते हैं | एक छोटे से विचार और थोड़ी सी दयालुता अक्सर एक बहुत अधिक पैसे से अधिक मूल्यवान होती है।

आज आगरा पूरे देश में दयालुता करने में सबसे आगे है| जब समाज को किसी भी रूप ज़रूरत पड़ती है अभी हाल में तमाम संगठन कोविड-19 महामारी दयालुता दिखाते हुए ना केवल उनके दवा -दारू ,खाने पीने, वस्त्र ,अनेक तरह की सभी सामान की व्यवस्था की ।तमाम जनकारो से पूछा कहते है कि हमारे तो पाप धुल गए जो हम किसी के काम आ सके राजीव भाई बड़ा ही आत्म संतोष है ।भाई दयालुता की शक्ति व्यक्ति नही पूरे समाज को ख़ुशी ,संपन्नता ,स्वस्थ व एक सूत्र में बाँधता है ।यही बात पूरे विश्व में लागू होती हैं । मार्क द टाइगर ने भी लिखा है दयालुता वह भाषा है जो बहरा सुन सकता है और देश अंधे देख सकता है

– राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोकस्वर, आगरा

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