पाकिस्‍तान से भारत में बसने आए 34 हिंदू परिवारों के 128 सदस्‍य

नई दिल्‍ली। बीते सात दशक से पाकिस्तान में कट्टरपंथियों का दंश झेल रहे पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए नागरिकता संशोधन कानून भारत का नागरिक बनने के लिए आशा की नई किरण लेकर आया है। इसी आशा के साथ गुरुवार देर रात अटारी सड़क सीमा के रास्ते 34 पाकिस्तानी हिंदू परिवारों के 128 सदस्य भारत पहुंचे।
25 दिन के वीजा के साथ पहुंचे इन हिंदुओं को हरिद्वार की धार्मिक यात्रा करने की अनुमति है लेकिन जिस प्रकार ये हिंदू भारी-भरकम सामान लेकर आएं हैं, उससे से स्पष्ट है कि वह भारत में बसने आए हैं। इनके सामान की जांच में आईसीपी में तैनात कस्टम अधिकारियों को काफी समय लगा। इन हिंदुओं के पूर्वज राजस्थान के रहने वाले थे। गुज्जर बिरादरी से संबंधित ये हिंदू पाकिस्तान में बहुत ही दयनीय हालत में रह रहे हैं।
हरिद्वार ले जाने वाली बस खराब हो गई। जिला प्रशासन ने इनके लिए दूसरी बस का इंतजाम नहीं किया। सभी ने आईसीपी के बाहर खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में रात बिताई। जिला प्रशासन ने भी यात्रियों के लिए रात बिताने का कोई इंतजाम नहीं किया। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार पहली बार आईसीपी में देखने को मिला। कुछ यात्रियों ने ठंड से बचने के लिए अटारी सड़क सीमा पर स्थित दुकानों में लगे तिरपाल के नीचे शरण ली।
पाकिस्तान में अति गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले इन हिंदू परिवारों के साथ आए विष्णु कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सभी 25 दिन के वीजा पर आए हैं लेकिन वह पाकिस्तान लौटना नहीं चाहते। उनके रिश्तेदार राजस्थान में रहते हैं, उनका परिवार इनके साथ रहना चाहता है। विष्णु के अनुसार पाकिस्तान रेंजर ने वाघा सीमा पर उन्हें कई घंटे रोके रखा, जिस कारण वह देरी से भारत पहुंचे।
प्रशासन अगर रात में रहने का इंतजाम कर देता तो अच्छी बात थी। उनकी बचपन से इच्छा है कि वह भारत में रहे। पाकिस्तान के हिंदू भारत में ही रहना चाहते हैं। भारत सरकार पाकिस्तानी हिंदुओं को सभी सुविधा उपलब्ध कराए तो पाकिस्तान में बचे सभी हिंदू यही बसना चाहेंगे।
रहीम यार खान से आए पहवान नामक व्यक्ति ने कहा की वह भारत में रहने के लिए आए हैं। सिंध में बसे हिंदुओं की हालात ठीक नहीं है। वहां धर्म परिवर्तन की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। वहां का हिंदू सहमा हुआ है। अधिकांश हिंदुओं का कहना था कि वह हरिद्वार नहीं राजस्थान में अपने रिश्तेदारों के यहां जाएंगे। बाद में शुक्रवार सुबह ये हिंदू परिवार बसों में बैठकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
-एजेंसियां

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