वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान केदारनाथ के कपाट

देहरादून। आज सोमवार को वैदिक परंपरा के अनुसार, मंत्रोच्चार एवं बाबा के जयकारों के साथ आज सुबह पूरे विधि विधान के साथ 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान श्री केदारनाथ के पट खुल गए। लॉकडाउन के चलते सिर्फ़ कुछ लोगों को ही इस शुभ बेला का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हो सका।
अब कल 18 मई अर्थात् मंगलवार को केदारनाथ के क्षेत्रपाल भगवान भैरवनाथ के कपाट भी खुल जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की सायंकालीन पूजा-अर्चना व आरती भी शुरू हो जाएगी।
18 मई मंगलवार को केदारनाथ के क्षेत्रपाल के रूप में पूजनीय आराध्य भगवान भैरवनाथ के कपाट खुलने के साथ ही भगवान केदारनाथ की सायंकालीन आरती भी शुरू हो जाएगी। इसी दिन आराध्य के स्वयंभू लिंग पर नए स्वर्ण मुकुट को भी सुशोभित किया जाएगा।

रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा 900 ग्राम के इस स्वर्ण मुकुट के संरक्षण की जिम्मेदारी देवस्थानम बोर्ड को सौंपी गई है। केदारनाथ के 1008 रावल भीमाशंकर लिंग ने शीतकाल में 900 ग्राम स्वर्ण मुकुट का बंगलूरू में निर्माण कराया है।

इस स्वर्ण मुकुट को लेकर खास बात यह है कि देवताओं में बाबा केदार और मनुष्य में सिर्फ केदारनाथ के रावल ही इसे धारण करते हैं। बीते 7 मई को पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में प्रशासन, पुलिस, देवस्थानम बोर्ड और हक-हकूकधारियों की संयुक्त बैठक में रावल भीमाशंकर लिंग ने इस नए स्वर्ण मुकुट का अनावरण किया था।

जबकि बीते 14 मई को बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान से पूर्व स्वर्ण मुकुट को गर्भगृह में पूजा-अर्चना के बाद हवन से शुद्ध किया गया था। इसके बाद पंचकेदार गद्दीस्थल में रावल द्वारा स्वयं पंचमुखी भोगमूर्ति पर यह स्वर्ण मुकुट सुशोभित किया गया।
– एजेंसी

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