विश्व धरोहर रेलवे ट्रैक पर फिर दौड़ा 115 साल पुराना स्टीम इंजन

विश्व धरोहर कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर बुधवार को 115 साल पुराना ऐतिहासिक स्टीम लोकोमोटिव इंजन ‘केसी- 520’ फिर नजर आया। इस स्टीम इंजन को सुबह शिमला से सोलन के कैथलीघाट के लिए रवाना किया गया। इसकी बुकिंग ब्रिटिश सैलानियों ने करवाई थी। इस दौरान ब्रिटिश सैलानियों ने शिमला से कैथलीघाट तक 21 किलोमीटर का सफर स्टीम इंजन से जोड़े गए दो लग्जरी कोच सीटी 12 व 13 में तय किया।
सुबह 11 बजे स्टीम इंजन शिमला से कैथलीघाट के लिए रवाना हुआ। एक घंटे कैथलीघाट में रुकने के बाद स्टीम इंजन वापस शिमला रवाना हुआ। साल 2020 का यह पहला स्टीम इंजन रन है। रवाना होने से पहले सैलानियों ने शिमला रेलवे स्टेशन और स्टीम इंजन की खूबसूरती को अपने कैमरों में कैद किया।
तीखी सिटी और छुक छुक की आवाज सुनते ही रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्री तथा रेलवे स्टाफ टकटकी लगाए स्टीम इंजन की ओर देखने लगे। रेलवे के स्टेशन अधीक्षक शिमला प्रिंस सेठी ने बताया कि सात ब्रिटिश सैलानियों ने 115 साल पुराना स्टीम लोकोमोटिव इंजन ‘केसी-520’ की बुकिंग करवाई थी।
पिस्टन से निकलती है ‘छुक-छुक’ की आवाज, स्टीम से बजती है सिटी
रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज सिर्फ स्टीम इंजन से पैदा होती है। स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज पैदा होती है। स्टीम इंजन में बजने वाली सीटी भाप के दबाव से बजती है। डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती है।
विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन
शिमला-कालका रेल लाइन विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन है। 10 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। दार्जिलिंग रेलवे और नीलगिरि रेलवे को भी विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।
96 किलोमीटर में 102 सुरंगें और 800 पुल
1903 में बिछाई गई 96 किलोमीटर कालका-शिमला रेल लाइन में 102 सुरंगें, 800 पुल, 919 मोड़ और 18 रेलवे स्टेशन हैं। समुद्र तल से ट्रैक की ऊंचाई 2800 फुट से लेकर 7 हजार फीट है।
-एजेंसियां

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