चम्‍पारण सत्‍याग्रह के 100 साल: अहसास बना रहे कि हम आज़ाद हैं

100 Years of Champaran Satyagraha: Keep Realizing that we are free
चम्‍पारण सत्‍याग्रह के 100 साल: अहसास बना रहे कि हम आज़ाद हैं

चम्‍पारण सत्‍याग्रह के आज 100 साल पूरे होने पर हमें यह अहसास बनाए रखना है कि हम आजाद हैं और इसके लिए महात्‍मा गांधी ने जो शुरुआत की थी, वह जाया नहीं जाने दी जाएगी।
10 अप्रैल1917 में पहली बार महात्मा गांधी द्वारा भारत में जन आंदोलन की शुरुआत की गयी थी. राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर महात्मा गांधी चंपारण गए और नील की खेती के विरोध में सत्याग्रह किया.

इस आंदोलन के शुरू होने से पहले तक महात्मा गांधी नामी बैरिस्टर थे, और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ एक आंदोलन कर चुके थे. चंपारण आंदोलन महात्मा गांधी के संघर्ष में मील का पत्थर साबित हुआ. आज जबकि चंपारण आंदोलन की शताब्दी है तो इस ऐतिहासिक आंदोलन से जुड़ी कुछ बातें यहां साझा कर रहे हैं.
10 अप्रैल 1917 को राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर महात्मा गांधी पहली बार बिहार के चंपारण पहुँचे.

चंपारण आंदोलन की मुख्‍य  बातें   

चंपारण आंदोलन महात्मा गांधी का भारत में पहला जन आंदोलन था.

बिहार के गवर्नर से अनेक पत्राचार के बाद महात्मा गांधी ने जांच समिति के गठन की मांग की.

बिहार के शासकों व गवर्नर ने तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार को पत्र लिखकर बताया कि महात्मा गांधी के खिलाफ क्या कार्यवाही की जाएगी.

बिहार के गवर्नर ने महात्मा गाँधी के नील के खेतों के दौरे व नील की खेती कर रहे किसानों से मुलाक़ात को भी प्रदेश की शान्ति के लिए खतरा बताया.

महात्मा ने अंग्रेज सरकार द्वारा दी गयी अपनी केसर-ए-हिंद की उपाधि वापस लौटा दी.

महात्मा गांधी ने चंपारण में नील की खेती कर रहे किसानों की स्थिति बंधुआ मज़दूरों जैसी बताई थी.

लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एडवर्ड गैट ने महात्मा गाँधी को रांची में उनसे मिलने का न्योता भेजा.

तमाम चर्चाओं के बाद महात्मा गांधी को नील की खेती की जांच के लिए ”चंपारण एग्रेरियन कमेटी” बनाई गई और गांधीजी को भी इस कमेटी का सदस्य बनाया गया.

इस फैसले के बाद वायसराय गांधीजी के पास वापस लौटे और उनसे केसर-ए-हिंद की उपाधि वापस लेने का आग्रह किया.

 चंपारण आंदोलन के बाद से ही देश में सामाजिक न्याय के लिए सत्याग्रह का मार्ग प्रशस्त हुआ.

चंपारण आंदोलन के दूरगामी परिणाम स्वरूप इस जिले में चिकित्सा, शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंची. चंपारण में खादी संस्था और आश्रम की भी स्थापना हुई.
चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगे. इस अवसर पर बापू के बिहार से खूबसूरत रिश्ते को सहेजेंगे.

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यह कार्यक्रम एक साल तक चलेगा और 20 अप्रैल को 2018 को इसका समापन होगा. गांधी परिवार के सदस्य भी इसके गवाह बनेंगे. 17 अप्रैल को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शताब्दी समरोह में शिरकत करेंगे. वे देश की आजादी में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करेंगे.
दस अप्रैल को राज्य सरकार की ओर से आयोजित चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष का शुभारंभ होगा. शताब्दी वर्ष के दौरान पूरे साल कार्यक्रम चलेंगे और गांधीजी की स्मृतियों को ताजा किया जाएगा.

महात्मा गांधी के सत्याग्रह का पहला प्रयोग बिहार के चम्पारण जिले में हुआ था. बापू आज से ठीक सौ साल पहले 10 अप्रैल 1917 को बिहार आए थे. चंपारण के किसान राजकुमार शुक्ल ने उन्हें बुलाया था. बापू इस दौरान चंपारण में तीन दिन रुके, किसानों की पीड़ा जानी और उन्हें तीनकठिया प्रथा से मुक्ति दिलाई.
– Legend News

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