सुप्रीम कोर्ट ने की पूर्ववर्ती मुलायम नीत उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति केहर ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “ राज्य सरकार सार्वजनिक फंड का दुरुपयोग कैसे कर सकती है।” शीर्ष अदालत ने यह भी माना कि राज्य सरकार न तो सार्वजनिक फंड के दुरुपयोग की जिम्मेदारी ले रही है और न ही यह फंड लौटा रही है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में इटावा स्थित चौधरी चरण सिंह कॉलेज को उपलब्ध कराये गये सार्वजनिक फंड के मुद्दे पर स्पष्ट पक्ष न रखने के लिए वर्ष 2004 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव नीत सरकार की आज आलोचना की।

मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को विस्तृत जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
न्यायमूर्ति केहर ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “राज्य सरकार सार्वजनिक फंड का दुरुपयोग कैसे कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में इटावा स्थित चौधरी चरण सिंह काॅलेज को उपलब्ध कराये गये सार्वजनिक फंड के मुद्दे पर स्पष्ट पक्ष न रखने के लिए वर्ष 2004 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव नीत सरकार की आज आलोचना की।

मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को विस्तृत जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

न्यायमूर्ति केहर ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, “ राज्य सरकार सार्वजनिक फंड का दुरुपयोग कैसे कर सकती है।” शीर्ष अदालत ने यह भी माना कि राज्य सरकार न तो सार्वजनिक फंड के दुरुपयोग की जिम्मेदारी ले रही है और न ही यह फंड लौटा रही है।

याचिकाकर्ता महेंद्र नाथ राय ने न्यायालय में प्रस्तुत अपनी याचिका में कहा है कि मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि इटावा में चौधरी चरण सिंह काॅलेज को फंड के रूप में उपलब्ध करायी थी, जोकि गैरकानूनी था।

– एजेंसी

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