शरारत और मजाक में 100 नंबर डायल करने वालों के साथ पुलिस सख्ती से निपटेगी पुलिस

शरारत और मजाक में 100 नंबर डायल करने वालों से पुलिस सख्ती से निपटेगी। इन पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम से अलग सेटअप तैयार किया गया है। हर रोज आने वाली फर्जी कॉल्स या ब्लैंक कॉल्स पर नजर रखी जा रही है।
इनमें ऐसे कॉलर भी हैं, जो सीरियल ऑफेंडर हैं। शराब पीकर रोजाना 100 नंबर डायल करके अपनी भड़ास निकालते हैं या मजे लेने के लिए फोन कर देते हैं। पुलिस कंट्रोल रूम इनके खिलाफ ऐक्शन मोड में है। पुलिस के साथ शरारत कर रहे ऐसे लोगों के खिलाफ उनके इलाके के थाने में एफआईआर दर्ज होगी।
पुलिस कंट्रोल रूम में आने वाली कॉल्स पर नजर रखने में यह साफ हो गया है कि अधिकतर कॉल्स शराब के नशे में की जाती हैं। रात 10 से 2 बजे के बीच या आधी रात के बाद 1 बजे से तड़के 5 बजे के बीच ऐसी कॉल्स ज्यादा आती हैं। रोजाना 40 फीसदी ऐसी कॉल्स होती हैं, जिसे कोई बच्चा या अनजाने में किसी ने डायल कर दिया हो। कई ऐसे भी होते हैं, जो 100 नंबर डायल कर बस इतना कहते हैं कि वे रियलिटी चेक कर रहे थे।
फेक कॉल्स भी अधिक रहती हैं। कॉल के बाद पीसीआर वैन पहुंचती है तो न घटना, न चश्मदीद और न ही कॉलर का पता चलता है। पुलिस कॉलर के नंबर पर फोन करती है तो वह बंद रहता है। पुलिस अफसर भी मान रहे हैं कि फेक कॉल से पुलिस कंट्रोल रूम को कई बार असली कॉल्स से क्राइम की जानकारी समय पर नहीं मिल रही। टाइम पास करने के लिए की जा रहीं ऐसी कॉल्स पुलिस के लिए मुसीबत खड़ी कर रही हैं।
पीसीआर के सीनियर पुलिस अफसरों के मुताबिक, रोजाना तकरीबन दो दर्जन ऐसी कॉल्स की पहचान की जा रही है जो कि सीरियल ऑफेंडर हैं। वे जानबूझकर हरकत करते हैं। कॉलर के नंबर की पहचान कर लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। थाने को डिटेल भेजकर एक्शन के लिए निर्देश दिया गया है। पीसीआर के पास एक समय में 50 कॉल्स की लाइनें हैं। रोजाना 27 हजार से अधिक कॉल्स दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से आती हैं। कई कॉलर एक ही घटना के लिए बार-बार नंबर डायल करते हैं। इसकी वजह से भी फोन लाइन बिजी रहती है।

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