मशीन में कार्ड डाले बिना शॉपिंग करने का रास्‍ता खुला

बेंगलुरु। अब आपको शॉपिंग के लिए मशीन में कार्ड नहीं डालना होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए प्रॉक्सिमिटी पेमेंट्स की इजाजत देने के बारे में तीन कंपनियों के साथ मिलकर एक पायलट प्रॉजेक्ट चला रहा है।
मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि NPCI ने तीन स्टार्टअप्स फोनपे, टोनटैग और अल्ट्राकैश को इस प्रॉजेक्ट के लिए चुना है। डिजिटल पेमेंट्स के मामले में केंद्रीय इकाई NPCI के इस कदम से देश में मर्चेंट पेमेंट्स के इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रॉक्सिमिटी पेमेंट्स के जरिए कन्ज्यूमर मर्चेंट आउटलेट्स पर एक्सेप्टेंस टर्मिनल से किसी फिजिकल कॉन्टैक्ट के बिना डिजिटल पेमेंट्स कर सकेंगे। इससे सिक्यॉरिटी बढ़ेगी और ऐसे ट्रांजैक्शंस में स्टेबिलिटी भी आएगी। इस कदम के चलते डिजिटल पेमेंट्स लेने वाले मर्चेंट्स का दायरा भी बढ़ सकता है क्योंकि उन्हें कार्ड या स्मार्टफोन के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस की खातिर महंगे पॉइंट ऑफ सेल्स डिवाइस की जरूरत नहीं रह जाएगी। इस घटनाक्रम के संबंध में NPCI को भेजी गई ईमेल का जवाब नहीं आया।
NPCI का ताजा कदम हाल में उभरे कैश क्रंच और देश के सुदूरवर्ती इलाकों में मर्चेंट्स के आउटलेट्स पर महंगे पीओएस टर्मिनल लगाने से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए महत्वपूर्ण है। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने कहा कि ऐसे मामलों में इस तरह के सलूशंस अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं और इनके चलते फीचर फोन के जरिए भी पेमेंट हो सकता है। मामले की जानकारी देने वाले एक शख्स ने कहा, ‘यह पायलट प्रॉजेक्ट कुछ कैफेटेरिया और ऑफिस कैंटीन में ही चलाया जा रहा है। वहां पेमेंट्स सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। इस प्रोसेस की स्टेबिलिटी और सिक्यॉरिटी सुनिश्चित हो जाने के बाद इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करने की कोशिश की जा सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘यह अभी बहुत शुरुआती चरण में है। इसके लाइव होने में वक्त लगेगा।’
NPCI ने प्रॉक्सिमिटी पेमेंट्स के फायदों के बारे में सार्वजनिक किए गए एक बिड डॉक्युमेंट में कहा कि यूपीआई ट्रांजैक्शंस में कस्टमर को बेनेफिशियरी का वर्चुअल आईडी या बैंक खाता नंबर मैन्युअली टाइप करना होता है, लिहाजा इसमें चूक होने की आशंका रहती है। ऐसी गलतियों से प्रॉक्सिमिटी पेमेंट्स सलूशंस के जरिए बचा जा सकता है, जो नाम या नंबरों की बिना किसी मैन्युअल टाइपिंग के बेनेफिशियरी की पहचान कर सकता है। जानकारी देने वाले शख्स ने बताया, ‘ऐसे फीचर्स के जरिए इससे पेमेंट तेजी से और ज्यादा भरोसेमंद तरीके से हो सकता है। इससे कन्ज्यूमर को ज्यादा विकल्प मिलेंगे क्योंकि समूचा डिजिटल पेमेंट्स सिस्टम कन्ज्यूमर को कैश के उपयोग से दूर करते हुए उसे सहूलियत देने पर टिका है।’
इस प्रोसेस के बारे में उन्होंने बताया कि मर्चेंट अपने स्मार्टफोन या मोबाइल पीओएस से एक वाउचर जेनरेट करेगा और कस्टमर से पेमेंट स्वीकार करेगा। इसके बाद कस्टमर को अपने फोन के जरिए मर्चेंट की पहचान करनी होगी और पेमेंट प्रोसेस शुरू करना होगा। यूपीआई चैनलों के जरिए NPCI इस ट्रांजैक्शन को दोनों पक्षों के बैंक खातों के बीच सेटल कर देगा।
-एजेंसी

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