बुलदंशहर गैंगरेप मामले में बढ़ सकती हैं आजम खान की मुसीबतें

नई दिल्ली। बुलंदशहर गैंगरेप मामले में विवादित बयान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के खिलाफ दोबारा मामला खुल सकता है, क्योंकि पूर्व मंत्री को इस मामले में मिली माफी का एटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने विरोध किया है।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ के समक्ष श्री वेणुगोपाल ने आज दलील दी कि श्री खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहिए था, क्योंकि यह न्यायिक काम में दखलंदाजी का मामला है।

उन्होंने दलील दी, “इस तरह से मामले को बंद नहीं किया जा सकता। जिस शख्स को माफ़ी मिली है वह कई मामलों में ऐसे बयान देता रहा है।”

गौरतलब है कि अटार्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने उच्चतम न्यायालय से बुलंदशहर गैंगरेप मामले में न्याय में कथित रूप से बाधा डालने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे श्री खान ने एक बयान में बुलंदशहर कांड को राजनीतिक षडयंत्र बताया था।

पूर्व में क्‍या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के विवादास्पद मंत्री आजम खान को गुरुवार को निर्देश दिया कि सनसनीखेज बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड पर कथित टिप्पणियों के लिये वह ‘बिना शर्त माफी’ मांगे. इसके साथ ही न्यायालय ने ऐसे मामलों में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों से उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिए अटॉर्नी जनरल की मदद मांगी है.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने पुरानी कहावत को दोहराया कि एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते और उसने खां की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, “यदि वह (खान) बिना शर्त माफी मांगने संबंधी हलफनामा दाखिल करते हैं तो यह मामला खत्म है.” न्यायालय इस मामले में अब सात दिसंबर को आगे सुनवाई करेगा.

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने न्यायाधीशों से कहा कि हालांकि खान ने इस मामले की पीड़ितों के बारे में ऐसा नहीं कहा था जो उनके हवाले से कहा बताया गया है परंतु यदि पीड़ित के पिता किसी भी तरह से ‘अपमानित या आहत’ महसूस करते हैं तो समाजवादी पार्टी का यह नेता क्षमा याचना के लिये तैयार है. इस पर पीठ ने कहा, “दो सप्ताह के भीतर बिना शर्त क्षमा याचना का हलफनामा दाखिल किया जाए.”

पीठ ने कहा कि वह अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों से बलात्कार सहित जघन्य मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में पहले तैयार किए गए सवालों पर विचार करेगा. पीठ ने महिला की गरिमा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर देते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे की सामूहिक बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की को उसके पिता की पसंद के किसी नजदीकी केन्द्रीय स्कूल में दाखिला मिले.

पीठ ने कहा कि दाखिले और शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और केंद्र इसके लिए हर सहयोग देगा. पीठ ने यह भी कहा कि स्कूल यह भी सुनिश्चित करे कि पीड़िता की गरिमा पर कोई आंच नहीं आए. न्यायालय ने कहा, “यह विवाद यहीं खत्म नहीं होता. प्रतिवादी नंबर दो (खान) द्वारा दी जाने वाली बिना शर्त क्षमा या़चना पर न्यायालय विचार करेगा कि क्या इसे स्वीकार किया जाए. इस न्यायालय द्वारा पहले तैयार किए गए सवालों पर विचार किया जाएगा. हम अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से न्यायालय की मदद का अनुरोध करते है.”

न्यायमित्र की भूमिका निभा रहे विधिवेत्ता फली नरीमन ने पीठ से कहा कि न्यायालय द्वारा तैयार किए गए सवालों पर बहस होनी चाहिए ताकि बलात्कार और छेड़छाड़ जैसे मामलों में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के बयानों के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सके.

हालांकि पीठ ने टिप्पणी की कि महिला की गरिमा के लिए प्रेस की जिम्मेदारी और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए. न्यायालय ने कहा कि स्कूल में प्रवेश और शिक्षा पर आने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और केन्द्र इसके लिए हर तरह की सहायता करेगा. न्यायालय ने कहा कि स्कूल भी बलात्कार की शिकार इस लड़की की गरिमा सुनिश्चित करेगा.

 

– एजेंसी

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