चीन की मदद से पाकिस्‍तान अपना रेल नेटवर्क सुधारने की कोशिश कर रहा है

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रेल नेटवर्क को सुधारने के लिए चीन की तरफ से किए गए वादे ने इस दक्षिण एशियाई देश को अपने औपनिवेशिक काल के रेलवे के बुनियादी ढांचे को बदलने का मौका दिया है।
सॉफ्टवेयर बिजनेसमैन फारुख मलिक के लिए यह बदलाव दिख भी रहा है। 40 वर्षीय मलिक कहते हैं कि जब वह बच्चे थे, तभी से कराची से इस्लामाबाद ट्रेन से जाते हैं और काफी मुश्किल से 22 घंटे में यह सफर पूरा करते हैं।
मलिक के मुताबिक ‘ग्रीन लाइन जैसी ट्रेनें शुरू होने के बाद ट्रेन कम स्टेशनों पर रुकती है और अपने समय से चलती है, जो सबसे अच्छा बदलाव है।’
‘ब्लूमबर्ग’ के मुताबिक पेइचिंग कराची से पेशावर तक 1 हजार 163 मील रेल पटरी को अपग्रेड करने का काम करने वाला है। यह रेल लाइन अफगान सीमा से सटती है और इसके लिए चीन ने पाकिस्तान को 8 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। यह रेल लाइन चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड पहल का हिस्सा है, जिसके तहत चीन पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर की लगात से कई परियोजनाओं को पूरा करेगा।
हालांकि, अभी चीन की मदद से रेल नेटवर्क को अपडेट करने को मंजूरी नहीं मिली है लेकिन पाकिस्तान के गृह मंत्री एहसान इकबाल ने एक बयान में कहा था कि इस साल इस परियोजना का पहला चरण शुरू हो जाएगा।
पाकिस्तान रेलवे के सेक्रटरी परवीन आघा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले दशक में पाकिस्तान का रेल नटवर्क भ्रष्टाचार, देरी और गंदगी का पर्याय बन गया था लेकिन अब पाकिस्तान रेलवे ने बीते 5 साल में अपनी कमाई दोगुनी कर के 40.1 अरब डॉलर कर ली है और इसे अगले पांच सालों में फिर से दोगुना करने का लक्ष्य है।
आघा ने कहा, ‘यह हमारे लिए सबसे बड़े मौकों में से एक है। पूरे रेलवे सिस्टम का अपग्रेडेशन।’
चुनाव से पहले शुरू होगी मेट्रो
पाकिस्तान के दूसरे सबसे ज्यादा भीड़-भड़ाके वाले शहर में ट्रैफिक कम करने के मकसद से 1.6 अरब डॉलर की लागत से लाहौर मेट्रो के इस साल चुनाव से पहले शुरू होने की संभावना है। इस मेट्रो लाइन के लिए चीनी बैंकों ने लोन दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसने कुल 300 लोकोमोटिव इंजन, 1000 पैसेंजर कोच, करीब 5000 माल गाड़ी के डिब्बे और 31 स्टेशनों को दुरुस्त किया है। पाकिस्तान ने बीते साल 41.3 करोड़ डॉलर की लागत से जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी से 75 हाई-पावर्ड लोकोमोटिव भी खरीदे हैं।
यात्रियों को भी पसंद आ रहा है बदलाव
पाकिस्तान रेल नेटवर्क में आए ये बदलाव यात्रियों को भी पसंद आ रहे हैं और साल 2013 से लेकर अब तक यात्रियों की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़कर 5 करोड़ 20 लाख पहुंच गई है। ट्रेन के डिब्बों में स्नैक्स बेचने वाली 40 वर्षीय राणा इफ्तिखार अहमद कहती हैं कि वह बीते 15 साल से यही काम कर रहीं हैं लेकिन हाल के सालों में उनकी बिक्री 50 प्रतिशत तक बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले तक ट्रेन से कराची से लाहौर जाने में 4 दिन लगते हैं लेकिन अब इसी रास्ते ग्रीन लाइन ट्रेन आधे दिन से थोड़ा ही ज्यादा समय लेकर मंजिल तक पहुंचा देती है।
अहमद ने कहा, ‘पहले चीजें काफी पिछड़ी थीं, अब हम अपनी मंजिलों पर समय से पहुंच जाते हैं। अब ज्यादा से ज्यादा लोग रेल का इस्तेमाल करते हैं इसलिए बिक्री भी बढ़ गई है।’
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में इसी साल जुलाई में आम चुनाव होने हैं लेकिन फिलहाल देश विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है और इससे निपटने के लिए पाकिस्तान चीन, ईरान, तुर्की, अफगानिस्तान और यहां तक की भारत को भी रेल के जरिए निर्यात बढ़ाना चाहता है।
भ्रष्टाचार सबसे बड़ी चुनौती
दशकों से हो रहे निवेश के बावजूद पाकिस्तान रेलवे भ्रष्टाचार से भी जूझ रहा है। भ्रष्टाचार में लिप्त कई अधिकारियों को बर्खास्त तक किया गया है। ब्रोकरेज फर्म EFG हर्मेस पाकिस्तान लिमिडेट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर मुज्जमिल असलम कहते हैं, ‘भ्रष्टाचार इस प्रॉजेक्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। लेकिन अगर यह प्रॉजेक्ट शुरू हो जाता है तो इससे परिवहन सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा।’
सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय
पाकिस्तान की ट्रेनों में साल 2000 से लेकर अब तक हुए 137 हमलों की वजह से 96 लोगों की जान जा चुकी है, 480 घायल हो चुके हैं। यह आंकड़े साउथ एशिया टेररिजम पोर्टल ने दिए हैं। बीते 4 सालों में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रहा है और स्पेशल सिक्यॉरिटी फोर्स के 700 कमांडोज के साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।

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